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Testimonials 2018-02-23T13:21:05+00:00

We need to customize our products as per market demands. Varanasi Weavers Hub has given us the knowledge and skills through hands on workshops on diversified products, designs, colors etc. considering the season and taste of buyers.

Durga Prasad, Lohta

Varanasi Weavers Hub has enhanced my confidence and that has led me to become an entrepreneur from a wage earner. I inherited weaving from my father and worked on wages. I am associated with the Hub since the past 3 years and have undergone various trainings on design & product development, pricing, costing, color combination. I myself did a market survey at local markets and developed some contacts to get orders. Now, I produce and sell in the market and own 7 looms.

Nadir Hussain, Kotwa

Due to slow down in the handloom industry, I left my family work of weaving and migrated out from my village to work as a labour a couple of years back. I could not cope in the city and came back and started weaving business with one loom. I received handholding support from Varanasi Weavers Hub that has changed my life. Today, I have 10 looms and support a few small weavers who wanted to come back to weaving once again.

Aloknath, Sewapuri

I started weaving as a wage labour at the age of 16. After being associated with Varanasi Weavers Hub, I have gained information & knowledge and participated in various meetings, trainings and workshops on business skill development, design development, dye, colour matching, seasonal production etc. I used my learnings in my business and invested some savings to produce my own designs. It did well in the market and gradually my market outreach has increased. Today, I own 20 looms and also employ other weavers.

Mohd Iliyas, Lohta

Varanasi Weavers Hub will provide us platform to explore a wider customer base.

Kamaluddin Ansari, Ramnagar

The training on new design development is extremely useful. These designs cannot be easily copied on power looms

Babbuddin, Kotwa

आज तक अपनी बुनकारी जीवन में कभी भी हमने किसी प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है और संस्था द्वारा पहली बार हमे व्यापार करे की बारीकियों को समझने का मौका मिला है इसी प्रशिक्षण का ही परिणाम है की हम आज अपनी साड़ियों का दाम अपने से लगा कर सही मुनाफे की माँग व्यापारी से कर रही है

निजामुद्दीन, रामनगर

हम बचपन से ही बुनकारी का काम कर रहे है जैसा हमारे वालिद ने काम किया वही काम हम भी कर रहे थे लेकिन प्रशिक्षण में शामिल होकर हमें एहसास हुवा की हमारे काम का असली मुनाफा कैसे व्यापारी ले रहा है आज हमारी उम्र कम है लेकिन संघर्ष करने की क्षमता भी अधिक है इस लिए हमने बाज़ार में अपना बनाया हुआ माल बेचने की सुरुवात कर रहे हैं

अब्दुल अज़ीम, कोटव

रामनगर में हमारे 35 से अधिक करघे चल रहे है और हमारा व्यापार भी ीक ाक ही चल रहा है लेकिन जब से AIACA के सम्पर्क में आये है और प्रशिक्षण प्राप्त किया है तब से हमे हिम्मत मिली और ज्यादा पढ़ा-लिखा ना होने के बावजूद भी इंटरनेट से जुड़ कर अपने व्यापार को दुनिया के सामने लेन का साहस मिला और आज हमारे व्यापार का एक और रास्ता खुल गया है

मुस्तकीम, रामनगर

अभी तक हमारी पहचान एक ऐसे बुनकर के रूप में थी जो की अच्छा काम करता है लेकिन जब हमने प्रशिक्षण में भाग लिया तो पता चलi की हमारी पूरी उम्र निकल गई और हम अभी तक बुनकर की श्रेणी में ही आते है जब की और दुसरे लोग गृहस्ता बन कर अच्छा काम कर रहे है प्रशिक्षण के बाद अपनी जीवन में पहली बार हमने अपनी लागत और अपनी सोच से साडी बनाई है और उम्मीद करते है की अब मेरे जीवन की नयी सुरुवात होगी

गोपाल पाल, रामनगर